भोले ऐसी भांग पिला दे जो तन मन में रम जाए लिरिक्स
भोले ऐसी भांग पिला दे,
दोहा - शिव समान दाता नहीं,
है ये देवों के है देव,
भक्तों के हित विष पिया,
कहलाए महादेव।
भोले ऐसी भांग पिला दे,
जो...
आयो आयो रे शिवरात्रि त्यौहार भजन लिरिक्स
आयो आयो रे शिवरात्रि त्यौहार,
सारा जग लागे आज काशी हरिद्वार,
आयो आयो रे शिवरात्रि त्योहार।bd।
धरती और गगन ने मिलके,
शब्द यही दोहराए,
ओम नमः शिवाय बोलो,
ओम नमः...
महिमा तेरी समझ सका ना कोई भोले शंकर भजन लिरिक्स
महिमा तेरी समझ सका ना,
कोई भोले शंकर,
कभी तो भोले भंडारी हो,
कभी तो रूप भयंकर,
कभी तो भोले भंडारी हो,
कभी तो रूप भयंकर।bd।
भक्तों के मन को...
आओ भक्तो चलो चले खाटू नगर भजन लिरिक्स
आओ भक्तो चलो चले,
खाटू नगर श्याम के दर,
मेरा मन मचला जाए,
बीत ना जाये,
फागण का मेला,
कही छूट ना जाये,
आओ भक्तों आओ भक्तों,
चलो चले,
खाटू नगर श्याम...
ये सांवरा हारे का सहारा भजन लिरिक्स
ये सांवरा हारे का सहारा,
लखदातार बाबा ये,
श्याम हमारा,
ये साँवरा हारे का सहारा।bd।
तर्ज - ये दोस्ती हम नहीं।
तीन बाणधारी है,
लीले की सवारी है,
है यारों का...
खाटू के चप्पे चप्पे पे श्याम की है निगरानी भजन लिरिक्स
खाटू के चप्पे चप्पे पे,
श्याम की है निगरानी,
इस नगरी का कण कण बोले,
भक्तों श्याम ज़ुबानी,
मेरा बाबा शीश का दानी,
मेरा बाबा शीश का दानी।bd।
तर्ज -...
खाटू का राजा दरश दिखाओ जी भजन लिरिक्स
खाटू का राजा,
दरश दिखाओ जी,
म्हारो हिवड़ो ललचावे,
मन हार्यो जावे जी।bd।
तर्ज - बाला सा थाने कोण सजाया।
रींगस से खाटू,
पैदल आवा जी,
थारे तोरण द्वार पे,
मैं शीश...
ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं लिंगाष्टकम स्त्रोतम लिरिक्स
ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं,
ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं,
निर्मलभासित शोभित लिंगम्,
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं,
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम्।bd।१।bd।
देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं,
कामदहन करुणाकर लिंगम्,
रावण दर्प विनाशन लिंगं,
तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगम्।bd।२।bd।
सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं,
बुद्धि...
मेहंदीपुर बालाजी सच्चा ठिकाना भजन लिरिक्स
मेहंदीपुर बालाजी,
सच्चा ठिकाना,
आके यहाँ तू भी,
अर्जी लगाना,
मेहँदीपुर बालाजी,
सच्चा ठिकाना।bd।
तर्ज - परदेसियों से ना।
मेहंदीपुर के अजब नज़ारे,
रोग दोष यहाँ कटते सारे,
आके सभी तू दुखड़े मिटाना,
मेहँदीपुर...
बैठी हो माँ सामने कर सोलह श्रृंगार भजन लिरिक्स
बैठी हो माँ सामने,
कर सोलह श्रृंगार,
तू करुणा की है मूरत,
और ममता का भण्डार,
बैठी हो मां सामने,
कर सोलह श्रृंगार।bd।
तर्ज - देना हो तो दीजिये।
निरख रही...









