सिद्ध कुंजिका स्तोत्र, ।शिव उवाच। शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥…
कान्हा कान्हा आन पड़ी मैं तेरे द्वार, मोहे चाकर समझ निहार, कान्हा कान्हा आन पड़ी मैं तेरें द्वार।bd। तू जिसे चाहे ऐसी नहीं मैं, हाँ तेरी राधा जैसी नहीं मैं,…