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Yearly Archives: 2023

श्री श्याम घनश्याम नाम की महिमा भारी रे

श्री श्याम घनश्याम नाम की महिमा भारी रे

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श्री श्याम घनश्याम नाम की, महिमा भारी रे, ओ म्हारा कुल का देवता, क्यों देर लगाई रे।bd। तर्ज - था बिन दीनानाथ। सुदी ग्यारस की रात जगाई, कुनबों सभी बुलायो...
मारा सिर पर है भेरू जी रो हाथ कोई तो म्हारो कई करसी

मारा सिर पर है भेरू जी रो हाथ कोई तो म्हारो कई करसी

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मारा सिर पर है, भेरू जी रो हाथ, कोई तो म्हारो कई करसी।bd। जो आपे बिस्वास करे वो, खूंटी ताण के सोवे, बठे प्रवेश करे ना कोई, बाल ना बांको...
ठाकुर जी विराजे ओ बाडिया के मायने

ठाकुर जी विराजे ओ बाडिया के मायने

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ठाकुर जी विराजे ओ, बाडिया के मायने, आवे भगता की भिड़ अपार, कारज सारो आईने।bd। सीकर मंदिरयो है, ठाकुर जी को जोर को, अरे थारे चमक रिया हे काच, मंदिर के...
घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना दिया गजल लिरिक्स

घर की जरूरतों ने मुसाफिर बना दिया गजल लिरिक्स

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घर की जरूरतों ने, मुसाफिर बना दिया।bd। दोहा - रस्ते भर रो रो कर पूछा, हमसे पांव के छालों ने, बस्ती कितनी दूर बसा ली, दिल में बसने वालों...
मैं चूरू जाँऊगी बाबोसा दरबार में

मैं चूरू जाँऊगी बाबोसा दरबार में

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मैं चूरू जाँऊगी, बाबोसा दरबार में, हो बाबोसा दरबार में, मैं झुमु गाऊँगी, बाबोसा दरबार में, हो बाबोसा दरबार में, अ र र र र र।bd। चूरू में बाबोसा का, बड़ा प्यारा...
कालिका माता जी की लावणी लिखित में

कालिका माता जी की लावणी लिखित में

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कालिका माता जी की लावणी दुर्गा दुख भंजन, दुर्ग चित्तौड़ पर, करे राज कालका।bd। चित्तौड़ दुर्ग पर बैठी कालका, चारों ही खुट में राजे, अद्भुत आयुध ढाल हाथ में, शक्ति सिंह...
बरसाना मिल गया है मुझे और क्या कमी है लिरिक्स

बरसाना मिल गया है मुझे और क्या कमी है लिरिक्स

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बरसाना मिल गया है, मुझे और क्या कमी है, श्री जी भी तो मिलेगी, मुझको तो ये यकीं है, बरसाना मिल गया हैं, मुझे और क्या कमी है।bd। तर्ज -...
मैं तो रटू श्री राधा राधा नाम बिरज की गलियन में

मैं तो रटू श्री राधा राधा नाम बिरज की गलियन में

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मैं तो रटू श्री राधा राधा नाम, बिरज की गलियन में, रहू खोई खोई आठो याम, बिरज की गलियों में।bd। इत उत डोलू कही कही राधा, मिट जाए जीवन...
जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स

जिस नैया के श्याम धणी हो खुद ही खेवनहार लिरिक्स

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जिस नैया के श्याम धणी हो, खुद ही खेवनहार, वो नैया पार ही समझो, बिना पतवार ही समझो।bd। तर्ज - स्वर्ग से सुन्दर। तूफान में कश्ती चाहे, हिचकोले खाये, भंवर के...
भूतनाथ के द्वार पे जो भी अपना शीष झुका देता है

भूतनाथ के द्वार पे जो भी अपना शीष झुका देता है

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भूतनाथ के द्वार पे जो भी, अपना शीष झुका देता है, चिंताओं की सारी लक़ीरें, चिंताओं की सारी लक़ीरें, बाबा भूतनाथ मिटा देता है।bd। तर्ज - और इस दिल...
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